Dard Bhari Shayari mere sapno me aakar

Dard Bhari Shayari mere sapno me aakar

Dard Bhari Shayari mere sapno me aakar

 

Dard Bhari shayariसपने में आकर

Dard Bhari Shayari mere sapno me aakar
Dard Bhari Shayari mere sapno me aakar

 

mere sapno me aakar

रुला रहा था वो हमे फिर से सपने में आकर
तडपा रहा था वो हमे फिर से ख्वाबो में आकर
उसने पास रहके तो ना जीने दिया हमे दूर जाकर तो और भी तडपाया है
भूल जाना चाहते है जिसको हम न जाने क्यों अक्सर ख्वाबो में आकर वो सताता है

कुछ पुरानी यादे अक्सर हमे सपनों में दिख जाती है
खुसी की हो या गम की हो यादे अक्सर सपने में हमे रुलाती है
ये खवाब न जाने क्यों हमे इसे ही तडपाते है
दूर जा चूका है जो जिन्दगी से हमारे न जाने क्यों उसकी झलक दिखाते है

सपना हो खुली आँखों का या दिखे बंद आँखों से कुछ हासिल नही होता
टूट जाते है जब सपने हमारे तब जिन्दगी भर का है दुःख होता