hindi shayari uski marzi bina

hindi shayari uski marzi bina

hindi shayari uski marzi bina

 

 

hindi shayari– उसकी मर्जी बिना 

hindi shayari uski marzi bina
hindi shayari uski marzi bina

sab jante hain

 

हम अपनी गलती को नही है मानते उस रब को दोस देते है
अगर कर भी दे वो चमत्कार कोई तो उसे अंधविश्वास का नाम देते है
उसकी मर्जी से ही सब रचा है दुनियां में ये जान लो
बदनाम कर दिया है हमनें ईस्वर को ये मान लो

भगवान अल्लाह रब को सब मानते है
पर अलग अलग धर्म के नाम से उन्हें जानते है
भले ही अनेक नामों से इंसान ने उनकी पहचान बनाई है
पर ये सच है बनाने वाला एक ही है जिसने ये श्रीसटी रचाई है

पर कुछ ना समझ लोग पाप करके सोचते है के वो जन्नत पाते है
भूल जाते है लोग मनुष्य अपने अच्छे कर्मो से सवर्ग में जाते है
न जाने किस मानव ने यैसा इतिहास रचाया
कत्ल करके इन्सानियत का जन्नत जाने का रास्ता बताया

एसी सोच तो असुर जाती की होती थी
जो देव और मानव को मारकर सवर्ग में जाती थी
एसे ही किसी असुर ने ये काम कर दिया होगा
कलयूग में जिन्दा रखने के लिए अपने अंस को मानव के नाम कर दिया होगा

तभी इस यूग में कुछ लोग पाप करते है
इंसान होकर इन्सानियत को बदनाम करते है
मानते है सवर्ग जैसी ये धरती हो नही सकती
पाप और पुन्य है दो भाई किसी एक की कमी हो नही सकती

पर उसकी सकती के आगे कुछ नही ये मान लो
बुराई हर युग में है हारी सच्चाई से ये जान लो