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Sad Shayari teri khatir

Sad Shayari teri khatir

 

Sad Shayari-तेरी खातिर

Sad Shayari teri khatir
Sad Shayari teri khatir

teri khatir

तेरी खातिर न जाने कितनो से दुश्मनी कर बैठे हम
जिनकी नजरो में थी इज्जत हमारे लिए उन्हें भी अपना दुसमन समझ बैठे हम
मेरा कौंन कितना अपना था ये बाद में समझ आया
जब मुझे छोड़ अपनों के साथ चला गया वो और हमे कर गया पराया

न जाने क्यों हद से ज्यादा हमने उनसे प्यार कर लिया
औरो पे न करके भरोसा उनके प्यार पे एतबार कर लिया
उस भरोसे की हमने एसी ठोकर खायी
बना के दुसमन मुझे अपनों का वो हो गयी परायी

अक्सर किसी पे भरोसा करने का हमे ये सिला मिलता है
दुसमन बनाके हमे जमाने का वो फिर हमे नही मिलता है
हम तो किसी के नजरो में गिर ही जाते है
औरो की नजरो में जो इज्जत बनाई थी हमने वो इज्जत दुबारा कहाँ पाते है


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