Sad Shayari uski ek jhalak

Sad Shayari uski ek jhalak

 

Sad Shayari-उसकी एक झलक

Sad Shayari uski ek jhalak
Sad Shayari uski ek jhalak

 

uski ek jhalak

कभी उससे हर रोज लडा करते थे
आज उसकी आवज सुनने को भी तरस रहे है
कभी उसके पास होने से करते थे सीकायत
आज उसकी एक झलक देखने को तडप रहे है

न जाने ये किस्मत का कैसा खेल है
इसक की राह में आशिक हमेसा क्यों होता फेल है
जिसे करते है हम अपनी जान से भी ज्यादा मौहब्बत उसे पा नही सकते
फिर किसी और में दुड़ते है वो खुशी किसी और को अपना बना नही सकते

फिर जिन्दगी उलझ कर रह जाती है कुछ समझ नही आता
अपनों के होते हुवे भी न जाने क्यों एक अजीब सा अकेलापन जिंदगीभर है सताता
उलझ कर रह जाति है ये जिन्दगी फिर कोई भी खुसी हमे रास नही आती
याद आने पर कभी अपनी मौहब्बत इन आँखों में ढेर सारे आंसू है दे जाती

इसक का कीड़ा एक बार दिल में घुस जाये तो फिर मरते दम तक सताता है
फिर इलाज नही है इसका कोई आशिक जिन्दगी भर तडप कर रह जाता है