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Sad Shayari kuch khwab

Sad Shayari kuch khwab

Sad Shayari-कुछ ख्वाब

 

Sad Shayari kuch khwab
Sad Shayari kuch khwab

kuch khwab

कुछ ख्वाब दिखाये उसने खुस हो गये हम
कुछ प्यार जताया उसने फिर जमी में न रहे हमारे कदम
जब ठोकर लगाई उसने मुह के बल गिर गये
वो खुस नसीब है जो वक्त से पहले सभल गये

हम न जाने क्यों किसी के दिखलावटी प्यार को सच समझ लेते है
बदले में न जाने क्यों उसे अपना सब कुछ दे देते है
न जाने क्यों उसमे हमे एक अलग सा अपनापन नजर आता है
उसके सिवा दुनियां में फिर कोई और नही भाता है

पर उसके लिए हमारे दिल हमारे जज्बात का कोई मोल नही होता
तभी वो दिल भर जाने पर हमारे प्यार को ठोकर है देता
हम ही पागल है जो उसके इरादे समझ नही पाते
न जाने उसको पाने के लिए क्या क्या है कर जाते

पर वो हमारे दिल को राह में पड़े पड़े पथ्थर की तरह ठोकर मार देता है
साथ निभाने का करके झुटा वादा हमे अकेला कर देता है


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