hindi Shayari ghar se nikalate hai kya paane ke lie

hindi Shayari ghar se nikalate hai kya paane ke lie

 

hindi Shayari ghar se nikalate hai kya paane ke lie
hindi Shayari ghar se nikalate hai kya paane ke lie

ghar se nikalate hai kya paane ke lie

घर से निकलते है लोग ना जाने क्या पाने के लिए 
सपने सजाते है लोग सब दुःख भूल जाने के लिए 
पर ना जाने क्यों किसी के साथ एसा होता है 
कितने ही सपने अधुरा छोड़ वह अचानक मौत की नीद सोता है

ना जाने अभी के समय को क्या हो गया 
घर से सही सलामत निकले वाला इस दुनियां से हमेसा के लिए खो गया 
जिन्दगी का कोई भरोसा नही चार पल जिन्दगी के हसी खुशी जी लो 
कोसिस करो हमेसा खुश रहने की कडवी जुबां हमेसा के लिए सी लो