Bewafa Shayari ek bewafa ke yaado mein maayoosh

Bewafa Shayari ek bewafa ke yaado mein maayoosh

 

Bewafa Shayari ek bewafa ke yaado mein maayoosh
Bewafa Shayari ek bewafa ke yaado mein maayoosh

 

ek bewafa ke yaado mein maayoosh

एक बेवफा के यादो में मायूश होकर निकले घर से
यादो में उसके फिरते रहे दर बदर से
न किसी का होस न किसी का ख्याल रहा
बस किस्मत से सिर्फ ये सवाल रहा 

बेवफाई करनी ही थी तुमने तो प्यार क्यों हमे इनता किया
हमने तो रख्खा था सभाल के दिल अपना जो तुम्हे दे दिया 
तुम्हारी अदाओ से हमे कभी ये अहसास ना हुवा 
कभी कर दोगे हमसे बेवफाई ये विस्वास ना हुवा 

 कास किसी के चेहरे से उसकी बेवफाई का अहसास होता 
तो कोई भी आसिक किसी की बेवफाई पे ना रोता 
हर होने वाले धोके से पहले सभल जाते 
किसी की बेवफाई में रोने से अच्छा हम जिन्दगी में कुछ कर पाते