hindi shayari virus ya kudrat ka kahar25.3.2020

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hindi shayari-कुदरत का कहर

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kudrat ka kahar

मार्च के महीने में भी मौसम बरस रहा है
एसे देखो कुदरत अपना कहर बरस रहा है
ये है कुदरत का कहर या उस रब की कोई माया है
या है उसका ये कोई संकेत जो हमारे समझ में न आया है

पूरी दुनियां है खतरे में अभी न जाने आगे क्या अंजाम होगा
इस खतरे से सभलेगी पूरी दुनियां या बुरा अंजाम होगा
कोई होगी बुरी सकती तो उस रब के आगे नही टिक पायेगी
भले ही वो नुकसान थोडा जरुर करके जाएगी

होगा ये पैगाम हर इंसान के लिए कुदरत का दिखा के ये मौत का मंजर
सभल जाना आगे जिन्दगी में वरना और दिखेगा खोफनाक मंजर
उस रब ने ये दुनियाँ बनाई जिव जन्तु बनाया और उनमें सबसे समजदार बनाया इंसान
कुछ बिना सिग वाले दांनव रूपी मानव ने कीड़े मोकोड़ो को भी खाने से ना छोड़ा बन बैठा हेवान

बेजुबान उन जिव जन्तुओ की ही पुकार कुदरत का कहर बन कर हर मानव को सता रहा है
जो बिना सोचे समझे हर छोटे बड़े जीव को खा रहा है
तभी ये बिना दिखने वाला वायरस पूरी दुनियां में छा रहा है
और अंदर ही अंदर इंसान को खा रहा है

कुदरत से लड़ नही सकते दुनियां में प्यार बडाना
हर किसी को है जीने का हक यहाँ जिओ और जीने देना