hindi shayari vyakti ka karam hi dharam hai

hindi shayari vyakti ka karam hi dharam hai

hindi shayari vyakti ka karam hi dharam hai 

 

hindi shayari-कर्म ही धर्म है 

hindi shayari vyakti ka karam hi dharam hai
hindi shayari vyakti ka karam hi dharam hai

karam hi dharam hai

समाज किसी के धर्म से नही व्यक्ति के कर्म से नफरत करता है
उस मानव का कर्म ही है जो अपने धर्म को बदनाम करता है
अपनों और समाज की जो न करे प्रवाह वो इंसान नही
क़त्ल करे जो इंसानियत का उससे बड़ा कोई हैवान नही

हैरान है जिन्दगी ये सोचके आखिर लड़ाई इनकी किस्से है
जब जाना है इस दुनियाँ को छोड़ के एक दिन तो ये जंग किस्से है
क्यों चार दिन की जिन्दगी अपनों के साथ खुसी से नही जीते
क्या दुसरो की खुसी से जलते है जो चैन की साँस लेने नही देते

इंसान की खाल में छुपे वो इंसान नही हैवान है
जो पाप कर्म करके धर्म को अपने करते बदनाम है